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20-05-2020
कुछ तो चीन के अपारदर्शी रवैये और कुछ अमेरिका की घरेलू राजनीति ने दोनों देशों के रिश्ते को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है , जहां से यह एक अप्रिय रुख भी ले सकता है। और यकीनन , वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पडे़गा। अमेरिकी कांग्रेस में प्रभावशाली रिपब्लिकन सदस्य मार्क ग्रीन ने एक ऐसा विधेयक पेश किया है , जिसने यदि कानून का रूप लिया , तो फिर चीन से अमेरिकी कंपनियों का पलायन तेज हो जाएगा। प्रस्तावित ‘ ब्रिंग अमेरिकन कंपनीज होम ऐक्ट ’ में सरकार से यह अपेक्षा की गई है कि चीन छोड़कर स्वदेश आने वाली कंपनियों का वह सौ फीसदी स्थानांतरण भार वहन करे और उनके चीनी आयात पर आरोपित लेवी को भी माफ किया जाए। ग्रीन द्वारा पेश एक अन्य विधेयक अमेरिकी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील कंपनियों में चीन की रणनीतिक बढ़त को रोकने की मांग करता है। उधर पेंटागन ने भी मिसाइलों , युद्ध-सामग्रियों व हाइपरसोनिक हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ खनिज पदार्थों के लिए चीन पर निर्भरता खत्म करने वाला एक विधेयक तैयार किया है। ये सारी कवायदें बता रही हैं कि वाशिंगटन बीजिंग पर सिर्फ शाब्दिक प्रहार में नहीं जुटा ...
07-05-2020 editorial
भारत में अब तक लगभग 135 ट्रेनों में एक लाख से ज्यादा लोग अपने घर या गृह राज्य लौट चुके हैं , लेकिन यह लौटने की शुरुआत भर है। उत्तर प्रदेश और बिहार में ही करीब 40 लाख लोगों के लौटने का अनुमान है , मगर कुछ हजार लोगों के लौटते ही उन राज्यों की सरकारों पर जोर आने लगा है , जिन्हें मजदूरों का राज्य कहा जाता है। पश्चिम बंगाल सरकार ने तो मुंबई से आने के लिए तैयार अपने लोगों को निराश कर दिया। महाराष्ट्र में मंजूरी मिलने के बाद जब करीब 2,400 लोग बंगाल लौटने को तैयार थे , तब अचानक कदम पीछे खींचने की सराहना नहीं की जा सकती। उचित यही होगा कि लोगों के दबाव और लोकलाज के आगे पश्चिम बंगाल सरकार झुक जाए। बिहार सरकार की नीति भी कुछ बदलती दिख रही है , वह अब केवल बहुत जरूरतमंद लोगों की ही वापसी के पक्ष में है और इसे पूरी तरह से गलत भी नहीं कहा जा सकता। मजदूरों और अपने फंसे हुए लोगों की वापसी का दबाव उत्तर प्रदेश शुरू से ही आगे बढ़कर झेल रहा है और इसके लिए उसकी सराहना होनी ही चाहिए। फिर भी एक हलचल है कि कब तक और कितने लोग लौटेंगे ? घर वापसी शब्द सुनने में बहुत अच्छा लगता है , लेकिन कोरोना के समय में उत्तर...




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