Editorial dictation 21oct

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Editorial dictation



Danik jagran 80wpm 5 min 412 words
पाकिस्तानी सेना की ओर से आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए संघर्ष
विराम का उल्लंघन किए जाने से उकताई भारतीय सेना ने जो कठोर
कार्रवाई की उससे पाकिस्तान जरूरी सबक सीखते हुए दिखना चाहिए।
वास्तव में अब यह सुनिश्चित किया ही जाना चाहिए कि पाकिस्तान रह-
रह कर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने से बाज आए। यह अच्छी बात
है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को मुंहतोड़ जवाब देते हुए सीमा
पार के आतंकी ठिकानों को भी निशाना बनाया, लेकिन अगर बालाकोट
में की गई एयर स्ट्राइक के बाद गुलाम कश्मीर से हटाए गए आतंकी
शिविर फिर से वहां कायम ह्ये गए हैं तो इसका मतलब है कि पाकिस्तान
की जिह्ादी सोच ने नए सिरे से सिर उठा लिया है। इसकी एक बड़ी वजह
जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त करने का भारत सरकार का
फैसला हे सकता है। भारत के इस साहसिक फैसले के बाद पाकिस्तान
की बौखलाहट बढ़ी है। यह घरेलू मंचों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों
पर भी भारत के खिलाफ जहर उगल रह्म है। इसका कोई उपचार नहीं
नजर आता, लेकिन कम से कम अब तो ऐसे उपाय किए ही जाने चाहिए
कि पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन कर भारत को नुकसान पहुंचाने
से तौबा करे।
इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि सीमा पर पाकिस्तानी सेना
की ओर से की जाने वाली गोलाबारी से कभी हमारे जवान खेत रहते
हैं तो कभी सीमावर्ती इलाकों में रह रहे आम नागरिक। गत दिवस ही
तंगधार सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की ओर से की गई उकसावे वाली
गोलाबारी में हमारी सेना के साथ नागरिक आबादी को क्षति उठानी पड़ी।
आखिर यह सिलसिला कब थमेगा? यह बह सवाल है जिस पर सेना के
साथ-साथ सरकार को भी गंभीरतापूर्वक बिचार करना होगा। इस सवाल
पर विचार करना इसलिए आवश्यक हो गया है, क्योंकि फिलहाल इसकी
सूरत नहीं नजर आती कि पाकिस्तान भारत को नीचा दिखाने की अपनी
कुत्सित सोच का परित्याग करेगा। पाकिस्तान आतंकी संगठनों के सहारे
भारत के खिलाफ छेड़े गए छद्म युद्ध को जरूरत से ज्यादा लंबा खींच
रहा है। जब दुनिया भर के देश अपने बुनिवादी ढांचे पर निवेश करने में
लगे हुए है तब पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो आतंकी ढांचे पर निवेश
करने में लगा हुआ है। वह शायद ऐसा तब तक करता रहेगा जब तक
उसे इसकी कीमत नहीं चुकानी पड़ती। भारत की किसी सैन्य कार्रवाई में
अपने आर्तंकियों के मारे जाने से पाकिस्तान की सेहत पर असर इसलिए
नहीं पड़ता, क्योंकि उसकी धरती पर उन्हें तैयार करने वाले मदरसे बढ़ते
ही जा रहे है। 412words
Hindustan 90wpm
हम अपने देश में प्लास्टिक इस्तेमाल कम करने के लिए बड़ा अभियान
चला रहे हैं। दुनिया भर में तकरीबन हर जगह इस तरह के अभियान
चल रहे हैं। फिलहाल पहली कोशिश एक बार इस्तेमाल होने वाले
प्लास्टिक से मुक्ति पाने की है, क्योंकि वह दुनिया के प्लास्टिक प्रदूषण
में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। इसी के साथ खड़ी हुई एक अन्य
चुनौती है माइक्रो-प्लास्टिक, यानी प्लास्टिक के वे बारीक कण , जो
नंगी आंखों से नहीं दिखाई देते। ये हर जगह हैं। उस हवा में भी, जिसमें
हम सांस लेते हैं; उस पानी में हैं, जिसे हम इस्तेमाल करते हैं; उस भोजन
में भी, जिसे हम खाते हैं। ये कण नदी में हैं, तालाब में हैं और समुद्र में
भी। इसके साथ ही ये हमारी जमीन और मिट्टी में भी मिल चुके हैं, जहां
उनकी मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। आजकल रासायनिक उर्वरक की
जगह कूड़े से बनी कंपोस्ट के इस्तेमाल पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाने
लगा है। पर्यावरण को बचाने के लिहाज से यह एक अच्छा तरीका है,
लेकिन दिक्कत यह है कि हमारे कूड़े में प्लास्टिक होता है, जो कंपोस्ट
के जरिए हमारे खेतों में पहुंच जाता है। अमेरिका जैसे कुछ देशों के लिए तो यह समस्या कुछ ज्यादा ही
बड़ी है, क्योंकि वहां उत्पादन को
तेजी से बढ़ाने के लिए कई ऐसे
पदार्थ मिलाए जाते रहे हैं, जिनमें
भारी मात्रा में प्लास्टिक होता है।
असल में, मिट्टी में मिले प्लास्टिक
के दुष्प्रभावों से हम अभी तक
अनजान थे, अब ये धीरे-धीरे
सामने आने लगे हैं।
एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी ने
जमीन में पाए जाने वाले इस
माइक्रो-प्लास्टिक पर पिछले दिनों
जब शोध किया, तो कुछ काफी
खतरनाक संकेत मिले। उन्होंने पाया कि इसकी वजह से जमीन में पाए
जाने वाले केंचुए कमजोर होने लग गए हैं। जहां जितना माइक्रो-
प्लास्टिक है, वहां उतने ही कमजोर केंचुए हैं। केंचुए हमारी जमीन की
उर्वरता का ही नहीं, हमारी खाद्य सुरक्षा का भी बहुत बड़ा आधार हैं।
एक तो वे मिट्टी में मौजूद कचरे को पौधों के लिए खाद में बदल देते हैं,
दूसरे वे मिट्टी को इस तरह से पोला बनाते हैं कि उसमें मौजूद पेड़-
पौधों की जड़ें आसानी से सांस ले सकें। खासतौर पर बीजों के अंकुरण
में इसकी सबसे बड़ी भूमिका होती है। इसीलिए पिछले कुछ समय से
वर्मी कंपोस्ट पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाने लगा है। जाहिर है, जमीन
में माइक्रो-प्लास्टिक बढ़ने का अर्थ है मिट्टी की उत्पादकता का कम
होना। दिलचस्प बात यह है कि जो वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे, वे
यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि क्या मिट्टी में माइक्रो-प्लास्टिक
मिलाने से उसकी उत्पादक क्षमता बढ़ाई जा सकती है, और उन्हें जो
नतीजा मिला, वह इसके बिल्कुल उलट था।
इस प्रयोग ने हमें एक और कारण दे दिया 445words


Jansatta 100wpm 5min
भरतीय सेना ने पाकिस्तान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी
है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कम से कम चार ऐसे
ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है, जहां से आतंकियों को भारतीय सीमा
में घुसपैठ कराया जाता था। आर्टिलरी गन का इस्तेमाल करते हुए
भारतीय सेना ने यह हमला किया। इसमें पाकिस्तान के चार से पांच
सैनिकों के भी मारे जाने की खबर है। गौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना
लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रही थी। उड़ी, बारामूला और
तंगधार आदि इलाकों में वह लगातार गोलीबारी कर रही थी। इस तरह
उसकी इन हरकतों के चलते पिछले हफ्ते भारतीय सेना के दो जवान
और एक नागरिक मारे गए थे। इसकी जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना
ने यह हमला किया। भारतीय सेना लगातार चेतावनी देती रही है कि
पाकिस्तानी सेना उसे उकसाने का प्रयास न करे। उसकी हरकतों का
सख्त जवाब दिया जाएगा, मगर वह इसे समझने को तैयार नहीं। पिछले
एक साल में पाकिस्तानी सेना ने जितनी बार संघर्ष विराम का उल्लंघन
किया, उतना शायद ही कभी हुआ होगा इसके बावजूद पाकिस्तानी
हुकूमत दुनिया भर में यही साबित करने का प्रयास करती रही है कि
भारत ही उसे परेशान कर रहा है।
मगर अब पाकिस्तान की इन दलीलों का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कोई
असर नहीं होता। जबसे कश्मीर में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाया गया
है, पाकिस्तान की खीज लगातार बढ़ती गई है। वह अंतरराष्ट्रीय
बिरादरी में घूम-घूम कर बताता रहा है कि भारत ने कश्मीरी लोगों के
साथ अन्याय किया है। मगर हर जगह से उसे मुंह की खानी पड़ी है।
कोई भी देश उसके समर्थन में खुल कर सामने नहीं आया है । जो दबी
जुबान उसका साथ देते दिख रहे हैं, वे भी उसे कोई बल प्रदान करने
वाले नहीं हैं। इससे पाकिस्तान की खीज और बढ़ गई है । इसी का
नतीजा है कि वह कश्मीर में अस्थिरता बनाए रख कर भारतीय सुरक्षा-
व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है। करीब ढाई महीने तक
जब घाटी में कफ्फ्यू था और संचार सेवाएं बंद थीं, तब उसकी हरकतें
भी बंद थीं । पर अब जनजीवन सामान्य बनाने के इरादे से जब कर्फ्ू
हटा लिया गया है, संचार सेवाएं आंशिक रूप से खोल दी गई हैं, उसने
चरमपंथी संगठनों को सक्रिय कर दिया है । छिपी बात नहीं है कि
पाकिस्तानी सेना संघर्षविराम का उल्लंघन या बिना उकसावे के
गोलीबारी इसलिए करती है कि सीमा पार पनाह पाए आतंकियों की
भारतीय सीमा में घुसपैठ करा सके।
पाकिस्तान की समस्या यह है कि वहां कोई एक निजाम नहीं है ।
वहां की सरकार अपने ढंग से काम करना चाहती है, मगर उस पर
सेना और खुफिया एजंसी आइएसआइ का शिकंजा रहता है । सेना
अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए भारतीय सीमा पर अस्थिरता बनाए
रखना चाहती है। वह युद्ध की धमकी देती तो रहती है, लेकिन उसे
यह हकीकत भी अच्छी तरह पता है कि भारतीय सेना के सामने वह
टिक नहीं सकती। सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में हमले करके
जिस तरह भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, उससे
पहले ही उसे अंदाजा हो गया था 504

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