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Showing posts from April, 2020

01-05-2020 may editorial dictation

ऋषि कपूर का इस दुनिया से चले जाना वास्तव में भारतीय सिनेमा की मजबूत बुनियाद से एक जरूरी ईंट का सरक जाना है। वर्ह ंहदी सिनेमा की कम से कम तीन-चार पीढ़ियों के बीच एक सशक्त सेतु की तरह थे। बेहद खुशनुमा और सदा सक्रिय। जितने पारंपरिक , उतने ही आधुनिक। जितने गंभीर , उतने ही खिलंदड़। जितने लोकधर्मी , उतने ही प्रयोगधर्मी। अपने दादा पृथ्वीराज कपूर और पापा राज कपूर की दुनिया से खाद-पानी लेकर नई दुनिया के लिए तत्पर रहने वाले ऋषि कपूर को भूलना नामुमकिन है। भारतीय सिनेमा में उनकी छवि एक ऐसे चमकदार प्रेमी के रूप में रही , जिसने देश की कम से कम तीन पीढ़ी के प्रेमियों को प्रेरित किया। राजेश खन्ना के सुपर स्टार दौर की स्नेहिल पुकार से होकर निकले बॉबी  के प्रेमी ने न केवल एंग्री यंगमैन के दशक को पार किया , बल्कि समांतर सिनेमा के खुरदुरे आक्रोश भरे दशक के भी पार पहुंच गए। यह उनकी अभिनय प्रतिभा और अथक प्रेमी की छवि का ही प्रताप था कि 1992 में वह दीवाना  में सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं.. गाते नजर आए और दर्शकों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। हिंदी सिनेमा के रुपहले परदे पर उनके जैसा आधुनिक प्रेमी ...

30 april 2020 editorial dictation 100wpm

अपनी अनुपम सहजता से अभिनय का वैभव गढ़ने वाले अभिनेता इरफान की विदाई न केवल मनोरंजन उद्योग , बल्कि भारतीय समाज के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। अभी गत शनिवार को ही जयपुर में उनकी मां सईदा बेगम का निधन हुआ था और बुधवार को इरफान भी हमारे बीच से चले गए। उनके जाने से फिल्मों की दुनिया में स्वाभाविक ही जो शोक की लहरें उठी हैं , वे कुछ दिनों तक उनके मुरीदों को खूब भिगोएंगी। बहुत याद आएंगे इरफान और टीवी धारावाहिक श्रीकांत  व भारत एक खोज  से शुरू हुआ उनका पेशेवर कला जीवन। इरफान अभिनय के प्रति जुनून वाले अभिनेता थे , इसलिए उनके शुरुआती काम को देखकर ही लग गया था कि वह कला-दुनिया में दूर और ऊंचाई तक जाएंगे। प्रतिकूल पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद जयपुर से एक हठ के साथ निकले और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से प्रशिक्षित इरफान ने मनोरंजन की दुनिया में इतना लंबा सफर तय किया कि वह हमेशा एक मिसाल रहेंगे। अव्वल तो यह दूरदर्शन या छोटे परदे के लिए भी हमेशा गर्व की बात रहेगी कि उसने अपने शुरुआती दौर में एक ऐसे कलाकार को मौका दिया , जो आगे चलकर न केवल भारतीय सिनेमा , बल्कि वैश्विक सिनेमा का एक चमकदार चेहरा...

29 april 2018 editorial 100 wpm

भारत सरकार ने कोरोना से बहुत मामूली रूप से संक्रमित मरीजों को उनके घर में रखकर ही उपचार के जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं , वे न केवल प्रशंसनीय , बल्कि अनुकरणीय भी हैं। जिन मरीजों में संक्रमण के बहुत मामूली संकेत हैं या जिनमें कोरोना के लक्षण उभरे नहीं हैं , उन्हें वाकई अस्पताल लाकर भीड़ बढ़ाने की जरूरत नहीं है। ऐसे मरीजों को उनके घर पर ही उपचार किया जा सकता है। ऐसे मरीजों के घर में एकांतवास की सहूलियत होना जरूरी है। साथ ही एक ऐसे समझदार तिमारदार की भी जरूरत पड़ेगी , जो अस्पताल से लगातार जुड़ा रहेगा। विशेष रूप से जो लोग जागरूक या सतर्क हैं , उन्हें इससे बड़ी सहूलियत हो जाएगी। आम तौर पर स्थिति के खराब होने या कोरोना के लक्षणों के उभरने के बाद ही मरीज अस्पतालों में भर्ती किए जा रहे हैं। सरकार के होम आइसोलेशन संबंधी दिशा-निर्देशों का महत्व तभी है , जब मरीज समय रहते सतर्क हो जाएं। ऐसे सतर्क मरीज को अस्पताल की सुविधाओं या भीड़ या डर से दो-चार नहीं होना पडे़गा। घर में एकांतवास में उपचार लाभ करते हुए समय पर बेहतर भोजन , दवा , पानी की सुविधा भी मिल सकेगी।   सरकार का यह कदम अस्पतालों को मरीजों...

28april 2020 editorial dictation

कोविड- 19 के खिलाफ छिड़ी जंग में प्लाज्मा थेरेपी की इन दिनों खूब चर्चा है , तो कोई आश्चर्य नहीं। दिल्ली व केरल के कुछेक अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी से उपचार के अनुकूल संकेत मिले हैं , जिनका हमें न केवल स्वागत , बल्कि चिकित्सकीय परीक्षण भी जारी रखना चाहिए। चूंकि कोविड- 19 नई बीमारी है , इसलिए इलाज की प्लाज्मा पद्धति को सोलह आना सटीक सिद्ध करने में वक्त लग सकता है। इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने कोरोना के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी को सीमित मंजूरी दे रखी है , मगर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इसे मान्यता नहीं दी है। इस पद्धति से ठीक होने वालों का ऐसा उच्च प्रतिशत चाहिए , जो डॉक्टरों को आश्वस्त कर सके। अभी इस पर सफलता की मुहर नहीं लगी है , हां , उपलब्ध संकेत अच्छे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी स्वयं आगे आकर बताया है कि प्लाज्मा थेरेपी का लाभ लेने वाले मरीजों की सांस की गति भी सुधरी है , और ऑक्सीजन स्तर भी।   वैसे प्लाज्मा थेरेपी कोई नई तरक्की नहीं है। करीब 70 वर्ष से चली आ रही इस थेरेपी का हाल के वर्षों में सार्स , स्वाइन फ्लू , इबोला जैसी बीमारियों में भ...