Rajasthan court 80wpm
समन” का उद्येश्य अदालत में पेश होने के लिए व्यक्ति के कानूनी दायित्व के बारे में व्यक्ति को सूचित करना है जबकि “वारंट” का मतलब उस व्यक्ति को कोर्ट में लाना होता है जिसने समन को अनदेखा कर दिया है और कोर्ट में हाजिर नही हुआ है.जब कोई अदालती कार्यवाही किसी पीड़ित पार्टी द्वारा किसी प्रतिवादी (अभियुक्त) के खिलाफ शुरू की जाती है तो बोलचाल की भाषा में इसे “समन” भेजना कहा जाता है. इस प्रकार “समन” एक कानूनी नोटिस है, जो सिविल और आपराधिक कार्यवाही के मामले जारी किया जाता है. समन में अदालत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने या कोई दस्तावेज पेश करने का आदेश जारी करती है. समन एक सिविल अधिकारी द्वारा प्रतिवादी (अभियुक्त) को रजिस्टर्ड डाक की सहायता से भेजा जाता है जिसमे प्राप्त कर्ता को अपने हस्ताक्षर करने होते हैं. इस हस्ताक्षर के आधार पर ही समन भेजने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है.समन और वारंट अदालत की शब्दावली में इस्तेमाल किये जाने वाले दो बहुत ही आम शब्द हैं.इन दोनों में बहुत ही कम अंतर माना जाता है. लेकिन इस लेख में हमने बहुत सूक्ष्म विश्लेषण करके इन दोनों के बीच कुछ अंतर बताये हैं....