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Showing posts from October, 2019

Editorial 1nov

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Editorial dictation 1 nov 2019 Hindustan 80wpm 400words इस बार उन पर जो संकट आया है, वह राजनीतिक है। यूं भी कह सकते हैं कि सत्ता संभालने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पहली बार किसी बडे़ राजनीतिक संकट से मुकाबिल हैं। वह भी उस समय, जब आर्थिक संकट तो उनकी जान के पीछे पड़ा ही है, विदेश नीति के मोर्चे पर भी वे लगातार मुंह की खा रहे हैं। मुल्क की राजनीति उनके लिए बड़ा सिरदर्द खड़ा कर सकती है, यह आशंका इमरान खान को शुरू से ही थी, इसलिए उन्होंने नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग को ध्वस्त करने के तमाम हथकंडे अपनाए। भ्रष्टाचार के आरोप में नवाज शरीफ और उनकी बेटी को जेल में भी डाल दिया। इस काम में सेना ने भी उनका पूरा साथ दिया। लेकिन अब लगता है कि वह अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी को कमजोर करके भी राजनीतिक संकट से खुद को बचा न पाए। संकट खड़ा किया है जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने। वह लाखों प्रदर्शनकारियों का कारवां लेकर पाकिस्तान के कई बडे़ शहरों का चक्कर काटते हुए अब राजधानी इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। उन्होंने अपने इस अभियान को आजादी मार्च का नाम द...

Editorial dictation 31 oct

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Steno help pp Editorial dictation Danikjagran 80wpm यह समय ही बताएगा कि कश्मीर पहुंचे यूरोपीय संघ के सांसदों का नजरिया भारत के इस हिस्से के बारे में विश्व समुदाय के रुख-रवैये को प्रभावित करने में कितना सह्यक होगा, लेकिन इसमें दोराय नहीं कि यह घाटी के हालात पर भी निर्भर करेगा। यूरोपीय देशों के सांसदों के श्रीनगर पहुंचते ही आतंकियों ने जिस तरह पश्चिम बंगाल के मजदूरों को निशाना बनाया उससे यह स्पष्ट है कि कश्मीर के हालात ठीक करने में अभी समय लगेगा। निःसंदेह इसमें सफलता तब मिलेगी जब आतंकियों को छिपने- भागने के लिए विवश किया जाएगा। वदि आम कश्मीरी जनता कश्मीर को बदनाम करने और वहां दहशत फैलाने में जुटे आतंकियों के खिलाफ मुखर हो सके तो माहौल कहीं आसानी से बदला जा सकता है। ह्यलांकि कश्मीर में पहले भी बाहरी लोगों को निशाना बनाया जाता रहा है, लेकिन बीते कुछ दिनों में घाटी के बाहर के लोगों को जिस तरह चुन-चुनकर मारा गया उससे न केवल यह स्पष्ट है कि पाकिस्तानपरस्त आतंकी गैर कश्मीरियों में खौफ पैदा करने पर आमादा हैं, बल्कि यह भी कि उनकी तथाकथित लड़ाई का राजनीतिक अ...

Editorial 30oct

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Steno help pp Editorial dictation 80,90,100wpm Jansatta 80wpm 5min 402words कमीर में बढ़ती आतंकी हिंसा की जो खबरें आ रही हैं, वे चिंताजनक हैं। पूरी कश्मीर घाटी में सेना, सुरक्षा बलों और पुलिस की भारी तैनाती, अनवरत निगरानी के बावजूद आतंकी जिस तरह से वारदात को अंजाम दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि आतंकियों का नेटवर्क अभी भी कमजोर नहीं पड़ा है और वे अपने मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं । सोमवार को सोपोर में आतंकियों ने बस अड्डे पर हथगोला फेंक कर हमला किया । इस घटना में बीस लोग घायल हो गए । इससे टीक तीन दिन पहले श्रीनगर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दल पर आतंकी हमले में छह जवान जख्मी हो गए थे । तीन दिनों में लगातार दो हमले बता रहे हैं कि आतंकियों का दुस्साहस कम नहीं हो पाया है और वे जगह-जगह बमों से हमले कर लोगों में दहशत फैलाने में कामयाब हो रहे हैं । हैरानी की बात यह है कि हमलावर आतंकी भाग निकलने में भी सफल रहते हैं । ऐसे में आतंकियों से निपटने की रणनीति पर सवाल उठने लाजिमी हैं। ऐसा लगता है कि घाटी में आतंकियों से निपटने और उन्हें खोज निकालने की ...

Editorial dictation 29 oct

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Steno help pp Editorial dictation 29 0ct 2019 Hindustan 402 words 80wpm  उसका खौफ तो अभी भी था, लेकिन इस्लामिक स्टेट का कथित खलीफा अल-बगदादी पिछले कई महीनों से एक हारती हुई ताकत की तरह था। इराक और सीरिया के वे सारे इलाके उससे मुक्त कराए जा चुके थे, जिन पर कभी उसका नृशंस राज चलता था। ऐसी खबरें लगातार आ रही थीं कि वह भागता फिर रहा है। रविवार को जब हम अपने देश में दीपावली मनाने की तैयारियां कर रहे थे, अमेरिकी फौज ने बगदादी को उसकी उसी मांद में मार गिराया, जहां वह पिछले काफी समय से छिपा हुआ था। इस्लामिक स्टेट के इस सरगना का मारा जाना पूरी दुनिया के लिए राहत की एक बड़ी खबर है। यहां तक कि पश्चिम एशिया के उन देशों के लिए भी, जिनका राजकाज अभी भी इस्लामिक रीति-नीति से चलता है। बगदादी ने जो पागलपन पैदा किया था, उसका पहला खतरा भी इन्हीं देशों को था। लेकिन इस्लामिक स्टेट का खतरा सिर्फ इसी तक सीमित नहीं था। वह तरह-तरह से पूरी दुनिया को घेर रहा था। एक छोटे से दौर में इसने तकरीबन पूरी दुनिया के नौजवानों को गुमराह करने की कोशिश की। यहां तक कि यूरोप और अमेरिका के आधुनिक समाज के बहुत सा...