19 april editorial
कोरोना से डॉक्टरों का पीड़ित होना न केवल दुखद, बल्कि बेहद चिंताजनक भी है। जहां दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर को कोरोना होने की वजह से करीब 900 लोगों को क्वारंटीन करना पड़ा, वहीं अब दिल्ली के कैंसर अस्पताल में सेवारत एक डॉक्टर के कोरोना पीड़ित पाए जाने से चिंता की लहर दौड़ गई है। उस पूरे अस्पताल को बंद करके चिकित्सकीय ढंग से साफ-सफाई की जरूरत पड़ गई है। इस डॉक्टर ने सावधानी नहीं बरती। वह ब्रिटेन से लौटे अपने भाई से मिलने गई थीं और वहीं से संक्रमित हुईं। डॉक्टरों के स्तर पर हो रही ऐसी लापरवाही को समझना कठिन है। जहां एक ओर, डॉक्टर ही लोगों को लगातार सचेत कर रहे हैं, वहीं उन्हीं के समाज की ओर से ऐसी लापरवाही गहरी चिंता जगा देती है। अब यह सवाल पैदा हो गया है कि आज कौन डॉक्टर संक्रमित है और कौन नहीं। जहां कोरोना मरीजों की तिमारदारी में लगे हजारों डॉक्टर अपने परिवार वालों से ढंग से मिल भी नहीं पा रहे हैं, वहां किसी डॉक्टर का अपने विदेश से लौटे भाई से मिलने चले जाना दुखद है। क्या चिकित्सा समाज को स्वयं सचेत नहीं रहना चाहिए? मरीजों की सेवा करते हुए कोरोना संक्रमित होने को संयोग या दुर्घटना कहा जा सकता है, लेकिन डॉक्टरों द्वारा स्थापित किसी नियम-व्यवहार की पालना न करते हुए संक्रमित होने की सिर्फ निंदा की जा सकती है। यह समय है, जब हर किसी को अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा। पढ़े-लिखे और जिम्मेदार लोगों से ज्यादा उम्मीद है।
चिकित्सा समाज और सरकार, दोनों पर सर्वाधिक जिम्मेदारी है। भूलना नहीं चाहिए, भारत में कोरोना की वजह से जो पहली मौत हुई थी, तब उस मरीज के डॉक्टर को कोरोना का अंदाजा नहीं था। वहां डॉक्टर का संक्रमित होना सहज माना जा सकता है, लेकिन अब जब कोरोना के संबंध में तमाम दिशा-निर्देश जारी हो गए हैं, तब सरकार को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उपचार के स्तर पर या चिकित्सा समाज के स्तर पर कोरोना को लेकर कोई लापरवाही न हो। यह भी जरूरी है कि हर डॉक्टर की भी नियमित देखभाल हो। अनेक डॉक्टर, नर्स, चिकित्साकर्मी कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हैं। इस बीच डॉक्टरों का आपस में मिलना-जुलना भी जारी है, अत: यह बहुत जरूरी हो जाता है कि कोरोना के मद्देनजर उनकी विशेष नियमित जांच हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सा समाज के किसी भी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण न हो सके। किसी भी तरह के सुरक्षा उपकरणों का अभाव नहीं होना चाहिए।
आज पूरी सावधानी बरतते हुए चिकित्सा समाज को भी अपना मनोबल बनाए रखना होगा। मनोबल बना रहेगा, तो इस समाज की सकारात्मकता और विश्वसनीयता बनी रहेगी। कोरोना के खिलाफ जंग में डॉक्टर ही हमारे महान रक्षक हैं। आज एक-एक सांस, एक-एक पल और एक-एक व्यक्ति महत्वपूर्ण है। भारतीय चिकित्सा समाज पूरी कुशलता और समर्पण भाव से इस बीमारी के खिलाफ लड़ रहा है। डॉक्टरों की वजह से ही दुनिया सांस लेने लायक बनती रही है और बनती रहेगी। उन तमाम डॉक्टरों, नर्सों, सेवकों को स्वस्थ होकर घर लौटना है, जो अपने घर-परिवार की खुशी त्यागकर जुटे हैं कि किसी की सांस न थमे। बेशक, डॉक्टर जीतेंगे और दुनिया उन पर पहले से बहुत ज्यादा गर्व करेगी।
चिकित्सा समाज और सरकार, दोनों पर सर्वाधिक जिम्मेदारी है। भूलना नहीं चाहिए, भारत में कोरोना की वजह से जो पहली मौत हुई थी, तब उस मरीज के डॉक्टर को कोरोना का अंदाजा नहीं था। वहां डॉक्टर का संक्रमित होना सहज माना जा सकता है, लेकिन अब जब कोरोना के संबंध में तमाम दिशा-निर्देश जारी हो गए हैं, तब सरकार को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उपचार के स्तर पर या चिकित्सा समाज के स्तर पर कोरोना को लेकर कोई लापरवाही न हो। यह भी जरूरी है कि हर डॉक्टर की भी नियमित देखभाल हो। अनेक डॉक्टर, नर्स, चिकित्साकर्मी कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हैं। इस बीच डॉक्टरों का आपस में मिलना-जुलना भी जारी है, अत: यह बहुत जरूरी हो जाता है कि कोरोना के मद्देनजर उनकी विशेष नियमित जांच हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सा समाज के किसी भी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण न हो सके। किसी भी तरह के सुरक्षा उपकरणों का अभाव नहीं होना चाहिए।
आज पूरी सावधानी बरतते हुए चिकित्सा समाज को भी अपना मनोबल बनाए रखना होगा। मनोबल बना रहेगा, तो इस समाज की सकारात्मकता और विश्वसनीयता बनी रहेगी। कोरोना के खिलाफ जंग में डॉक्टर ही हमारे महान रक्षक हैं। आज एक-एक सांस, एक-एक पल और एक-एक व्यक्ति महत्वपूर्ण है। भारतीय चिकित्सा समाज पूरी कुशलता और समर्पण भाव से इस बीमारी के खिलाफ लड़ रहा है। डॉक्टरों की वजह से ही दुनिया सांस लेने लायक बनती रही है और बनती रहेगी। उन तमाम डॉक्टरों, नर्सों, सेवकों को स्वस्थ होकर घर लौटना है, जो अपने घर-परिवार की खुशी त्यागकर जुटे हैं कि किसी की सांस न थमे। बेशक, डॉक्टर जीतेंगे और दुनिया उन पर पहले से बहुत ज्यादा गर्व करेगी।
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