14-05-2020 editorial
केंद्र सरकार ने कोरोना के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था को बल
देने की जो व्यापक पहल की है, उसका न केवल स्वागत, बल्कि पूरी तरह से क्रियान्वयन भी होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने
मंगलवार को अपने उद्बोधन में लॉकडाउन बढ़ाने और साथ ही देश को एक नया संकल्प देने
का जो प्रयास किया था, उसी की रोशनी में वित्त मंत्री निर्मला
सीतारमण की आर्थिक घोषणाओं को देखना चाहिए। कोरोना के समय देश को आत्मनिर्भर बनाने
की 20 लाख करोड़ रुपये की पहल एक तरह से देश का
ध्यान कोरोना से हटाकर एक बड़े आर्थिक सपने की ओर लगाना भी है। युवाओं के देश भारत की
ओर पूरी दुनिया देख रही है, यहां उत्पादन का बढ़ना जरूरी है। भारत के
पास श्रम शक्ति है, इसे यदि उत्पादक कार्यों में नहीं लगाया
जाएगा, तो हम न केवल अपने लिए समस्या बनेंगे, बल्कि विश्व के लिए भी चिंता का कारण बनते जाएंगे। बुधवार को
वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा में आत्मनिर्भरता शब्द पर विशेष जोर दिया गया है, तो कोई आश्चर्य नहीं। विशेष रूप से छोेटे (एमएसएमई) सूक्ष्म, लघु व मध्यम लघु उद्यमों को जिस तरह से समर्थन देने की कोशिश
हुई है, उससे निश्चित ही अर्थव्यवस्था को बल
मिलेगा। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि 20 लाख करोड़ की
राहत पैकेज का इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में किया जाएगा और किसको कितनी राशि दी
जाएगी। उद्यमों को अलग-अलग तरह से सहयोग देने का सरकार का इरादा उचित है। पहले चरण
की घोषणाओं के बाद आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा कि पैकेज राशि कहां कितनी
खर्च की जाएगी। निगरानी और ईमानदारी की जरूरत और बढ़ गई है। यह इसलिए भी जरूरी है, ताकि लॉकडाउन के कारण बेरोजगार हुए लोगों और विदेश से आए अपने
लोगों को भी अर्थव्यवस्था में समायोजित किया जा सके।
कई फैसले बहुत जोखिम भरे हैं, जैसे कम रेटिंग वाले एनबीएफसी को भी अब कर्ज मिलेगा, पर आज के समय को देखते हुए सरकार को निगरानी रखते हुए जोखिम उठाना ही होगा। एनबीएफसी के लिए 30 हजार करोड़ की स्कीम लाई जा रही है। डिस्कॉम क्षेत्र के लिए भी 90 हजार करोड़ की सहायता तय की गई है। आंशिक ऋण गारंटी योजना के विस्तार की मांग को भी सरकार ने पूरा कर दिया है। ईपीएफ के लिए दी गई मदद अगले तीन माह और जारी रहेगी। सरकार ने 15,000 रुपये से कम वेतन वालों का विशेष ध्यान रखा है, तो यह जरूरी भी है। यह हमारे देश का वह जरूरतमंद तबका है, जो न केवल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि उसे आज समर्थन की सबसे ज्यादा जरूरत भी है।
देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और फैसला गौर करने लायक है। देश में अब 200 करोड़ रुपये से कम का वैश्विक टेंडर जारी नहीं होगा। इससे देश की छोटी कंपनियों को लाभ होगा, आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। छोटी कंपनियों को कर चुकाने में रियायत और ऋण लेने में भी सुविधा मिलेगी। एमएसएमई की बदली हुई परिभाषा समय की मांग थी। कारोबार विस्तार के लिए भी 10,000 करोड़ रुपये का कोष सरकार ने रखा है। एमएसएमई को तीन लाख करोड़ का कर्ज बिना गारंटी मिलेगा। बहरहाल, इन तमाम घोषणाओं के बीच कोरोना का तनाव सबसे भारी है। जब पूरी सावधानी से लॉकडाउन खोला जाएगा, तभी हम राहत और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना शुरू करेंगे।
प्रधानमंत्री की
ओर से घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के पहले
चरण का जो विवरण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया उसके हिसाब से करीब छह
लाख करोड़ रुपये की राहत का रास्ता साफ हुआ। यह अलग-अलग सेक्टरों के लिए है, लेकिन इससे सबसे अधिक राहत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों यानी एमएसएमई को मिलेगी। चूंकि
एमएसएमई रोजगार उपलब्ध कराने में सबसे आगे हैं इसलिए इसका सीधा लाभ आम आदमी को
मिलते हुए दिखना चाहिए। यह अच्छा है कि आर्थिक पैकेज के जरिये
सरकार ने एमएसएमई की वे तमाम मांगे मान लीं जिन्हेंं एक अर्से से उठाया जा रहा था।
एक बड़ी मांग यह
थी कि एमएसएमई को नए सिरे से परिभाषित किया जाए। आखिरकार ऐसा कर दिया गया। अब
एमएसएमई की परिभाषा कहीं अधिक तार्किक दिख रही है।
उल्लेखनीय यह भी है कि एमएसएमई को बिना गारंटी तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज देने की
व्यवस्था की जाएगी। इस कर्ज की अवधि तो चार साल होगी ही, एक साल तक मूल धन चुकाने की भी जरूरत नहीं रहेगी। यह हर
लिहाज से एक बड़ी राहत है।
यह तय है कि
वित्त मंत्री की इस घोषणा से भी एमएसएमई को अच्छी-खासी राहत मिलेगी कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों का सरकारी कंपनियों में बकाये का
भुगतान 45 दिन में करने की कोशिश होगी। उचित यह होगा कि इस कोशिश को
अंजाम तक पहुंचाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि 45 दिनों में बकाये का भुगतान हर हाल में हो। यदि सरकार यह
सुनिश्चित कर सके तो एमएसएमई वित्तीय रूप से कहीं अधिक मजबूती हासिल करने में
समर्थ होंगी। नि:संदेह इस कदम का भी सीधा लाभ एमएसएमई को मिलने वाला है कि 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद में ग्लोबल टेंडर की अनुमति
नहीं होगी और सरकार को घरेलू कंपनियों से टेंडर मंगवाने की बाध्यता होगी। इससे
केवल छोटे उद्योगों को लाभ मिलने के साथ ही लोकल उत्पाद खरीदने की मुहिम को बल
मिलेगा।
इस मुहिम को बल
मिले और देश आत्मनिर्भर बने, इसके लिए एमएसएमई को भी अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष
ध्यान देना होगा। इसके साथ ही वित्त मंत्रालय को भी उन कारणों की तह तक जाना होगा
जिनके चलते उद्यमी कर्ज लेने में उत्साह नहीं दिखा रहे हैं। चूंकि वित्त मंत्री ने
इसकी भरपूर चिंता की है कि एमएसएमई को अधिकाधिक वित्तीय राहत मिले इसलिए उद्योगों को
भी इसके एवज में रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। इसलिए
और अधिक, क्योंकि आर्थिक पैकेज का मूल
उद्देश्य उद्योग-धंधों को बल देकर आम आदमी को राहत देना एवं उसकी रोजी-रोटी की
आशंकाओं को दूर करना है। 965
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