11-05-2020 editorial


                                                           Daily editorial 100 wpm

यह आशा की जाती है कि प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों से होने वाली आज की बातचीत में इस पर सहमति बनेगी कि कोरोना के साथ जीने का सिलसिला कैसे कायम किया जाए? जब यह स्पष्ट है कि अभी देश-दुनिया को कोरोना के साये में ही जीना होगा तब फिर उचित यही है कि लॉकडाउन से बाहर निकलने की रूपरेखा बनाने में देर न की जाए। ऐसी कोई रूपरेखा तभी प्रभावी साबित होगी जब लॉकडाउन खत्म करने का फैसला किया जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों में लॉकडाउन को और आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बनता। लॉकडाउन को केवल इसलिए खत्म नहीं किया जाना चाहिए कि उसकी भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ रही है, बल्कि इसलिए भी किया जाना चाहिए कि अब उसके नुकसान अधिक और फायदे कम दिख रहे हैं।
यह लॉकडाउन जारी रहने का ही नतीजा है कि कारोबारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों पर आधे-अधूरे ढंग से ही अमल हो पा रहा है। न केवल केंद्र सरकार, बल्कि राज्य सरकारों को भी इस पर गौर करना चाहिए कि बंदिशों के बीच उद्योग-व्यापार जगत अपना काम सही तरह नहीं कर सकता। हालांकि उद्योगों को उत्पादन की छूट देने की तैयारी से यह संकेत मिल रहा है कि लॉकडाउन को और विस्तार न देने का मन बनाया जा रहा है, लेकिन यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि सतर्कता बरतने के नाम पर कारोबार जगत अनावश्यक बंदिशों से जकड़ा न रहे।
इससे इन्कार नहीं कि लॉकडाउन से बाहर आना एक चुनौती भरा काम होगा, लेकिन संभावित चुनौतियों का सामना करने के अतिरिक्त और कोई उपाय भी नहीं। यह सामना इस तरह किया जाना चाहिए जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण बेलगाम न होने पाए। लॉकडाउन खत्म होने की स्थिति में किसी को भी इस नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए कि अब शारीरिक दूरी का पालन करने, साफ-सफाई को लेकर सजगता दिखाने और सेहत के प्रति सतर्क रहने की जरूरत नहीं रह गई है। यह जरूरत अभी लंबे समय तक बनी रहेगी। इसी के साथ यह भी जरूरी होगा कि हॉट-स्पॉट कहे जाने वाले इलाकों में कुछ पाबंदियां जारी रहें और अस्पतालों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए।
यह ठीक नहीं कि बीते कुछ दिनों से एक ओर जहां चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने के मामले बढ़े हैं वहीं दूसरी ओर उन मरीजों के भी जो किसी अन्य बीमारी का उपचार कराने अस्पताल गए थे। बेहतर हो कि केंद्र और राज्य सरकारें इस पर विशेष ध्यान दें कि स्वास्थ्यकर्मियों और साथ ही पुलिसकर्मियों को संक्रमण से कैसे बचाया जाए? कोरोना के खिलाफ लड़ाई के नायक यही हैं और इनकी हिफाजत हर हाल में करनी होगी।
हमारी दुनिया के उतने ही पहलू होंगे, जितने आसमान में तारे। हालांकि इन दिनों कोरोना सभी पहलुओं पर हावी है। इंसान भले ही सीधे उसके निशाने पर हो, प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। यह विडंबना ही है कि इंसान के लिए खतरनाक इस समय का दिलचस्प पक्ष यह है कि दुनिया में बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जो कोरोना से पहले असंभव था। जीव-जगत ही नहीं, पेड़-पौधों की दुनिया में भी सकारात्मक परिवर्तन दर्ज करने का सिलसिला जारी है। एक  अलग ही दुनिया नजर आ रही है। सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि आर्कटिक पर रिकॉर्ड आकार का ओजोन छिद्र, जो 2011 के बाद से सबसे बड़ा था, अब बंद हो गया है। संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) लगातार इसकी पड़ताल में लगा है। हालांकि कुछ वैज्ञानिक यह भी बता रहे हैं कि इसका सीधे कोरोना से संबंध नहीं है, लेकिन इतना तय है कि पृथ्वी पर आकाश, वायु, जल इत्यादि को राहत का एहसास हुआ है। 

लोग भूले नहीं हैं, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 2020 में कम होना शुरू हो जाना चाहिए, वरना पृथ्वी तेजी से एक ऐसी जगह में तब्दील होती जाएगी, जहां इंसानों और बाकी जीवों का रहना मुश्किल हो जाएगा। कोरोना की वजह से जो लॉकडाउन हुआ है, उसे देखते हुए वैज्ञानिक आश्वस्त हैं, पर्यावरण सुधार की जीवनदायी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसी ने यह सोचा नहीं था कि एक महामारी की वजह से ऐसा संभव होगा, लेकिन आज दुनिया का यही सच है। नासा और अन्य अंतरिक्ष विज्ञान संस्थानों के सैटेलाइट लगातार ऐसे चित्र भेज रहे हैं, जिनसे पता चलता है कि धरती पर प्रदूषण का स्तर बहुत घट गया है। अनुमान है, दुनिया में प्रदूषण में औसतन 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के अनुसार, इस साल कार्बन उत्सर्जन में पांच प्रतिशत से ज्यादा कमी के संकेत मिलने लगे हैं। मार्च से अप्रैल तक की बात करें, तो हम सौ साल पहले वाली प्रकृति और पर्यावरण में पहुंच रहे हैं। कार्बन उत्सर्जन में कमी की सबसे बड़ी वजह है, दुनिया में पहले की तुलना में 71 प्रतिशत कम हवाई जहाज उड़ रहे हैं। विमानों के कम उड़ने से जो अध्ययन हुए हैं, उनसे यह पता चलता है कि 33 प्रतिशत व्यावसायिक विमान यात्राओं के बिना भी काम चल सकता है। बेशक, आने वाले दिनों में कंपनियों के प्रबंधन में भी दिलचस्प बदलाव देखने को मिलेंगे। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में हर साल 70 लाख लोग वायु प्रदूषण की वजह से मारे जाते हैं। भारत की बात करें, तो दशकों बाद लोगों को साफ आसमान नसीब हुआ है। सेंटर फॉर इंटरनेशनल क्लाइमेट रिसर्च के अनुसार, फरवरी में वायु प्रदूषण में 30 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी, अगर प्रदूषण के इस स्तर को भी लंबे समय तक बनाए रखा जाए, तो हम हर साल 50 हजार से एक लाख लोगों की जान बचा पाएंगे। भारत के आंकडे़ उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन मार्च तक ब्रिटेन में सड़कों पर ट्रैफिक में 73 प्रतिशत तक कमी आई है। गौर कीजिए, अकेले ब्रिटेन में हर साल 30,000 हिरण सड़क दुर्घटना के शिकार होते हैं। कोरोना का तनाव भले व्याप्त है, लेकिन पृथ्वी नई हवा में सांस ले रही है, तैयार रहिए, परत-दर-परत उसके अनेक रोचक और लुप्त पहलू सामने आएंगे।971

Comments

Popular posts from this blog

20-05-2020

07-05-2020 editorial