Pm modi special skill 18

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PM MODI SPECIAL SKILL DICTATION




केवड़िया, गुजरात में सरदार पटेल जयंती पर एकता दिवस परेड के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन
90wpm 11 min GRADE D
साथियो, हम लोगों ने सरदार वल्‍लभ भाई पटेल के विचार अभी-अभी सुने। उनकी आवाज हमारे कानों में गूंजना, उनके विचारों की वर्तमान में महत्‍ता, प्रतिपल देश की एकता और अखण्‍डता के लिए सोचना- ये आज उनके एक-एक शब्‍द में, उनकी वाणी में हम अनुभव कर रहे थे। उनकी वाणी में जो शक्ति थी, उनके विचारों में जो प्रेरणा थी उसे हर हिन्‍दुस्‍तानी महसूस कर सकता है और ये भी बहुत विशेष है कि हम सरदार साहब की आवाज उन्‍हीं की सबसे ऊंची प्रतिमा के सानिध्‍य में सुन रहे थे।

साथियो, जिस तरह किसी श्रद्धा स्‍थल पर आकर एक असीम शांति 100 मिलती है, एक नई ऊर्जा मिलती है, वैसी ही अनुभूति मुझे यहां सरदार साहब के पास आ करके होती है। लगता है जैसे उनकी प्रतिमा का भी अपना एक व्‍यक्तित्‍व है, सामर्थ्‍य है, संदेश है; उतनी ही विशाल, उतनी ही दूरदर्शी और उतनी ही पवित्र देश के अलग-अलग कोने से, किसानों से मिले लोहे से, अलग-अलग हिस्‍सों की मिट्टी से इस भव्‍य प्रतिमा का निर्माण हुआ है, उसका आधार बना है और इसलिए ये प्रतिमा हमारी विविधता में एकता का भी जीवंत प्रतीक है, जीता-जागता संदेश है।

साथियो, आज से ठीक एक साल पहले दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा को200 देश को समर्पित किया गया था। आज ये प्रतिमा सिर्फ भारत वासियों को ही नहीं, पूरे विश्‍व को आकर्षित कर रही है, प्रेरित कर ही है। आज इस प्रेरणा स्‍थली से सरदार वल्‍लभ भाई पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए संपूर्ण राष्‍ट्र गौरव का अनुभव कर रहा है।

अब से कुछ देर पहले ही राष्‍ट्रीय एकता का संदेश दोहराने के लिए, एकता के मंत्र को जीने के लिए, एकता के भाव को चरितार्थ करने के लिए, एकता- ये हमारे संस्‍कार हैं, ये हमारी संस्‍कार सरिता है, एकता- ये हमारे भावी सपनों का सबसे बड़ा संबल है और उसी को ध्‍यान में  300पाते हैं कि एकरूपता उन देशों की विशेषता रही है, पहचान रही है और उसको ढालने का बहुत योजनाबद्ध तरीके से प्रयास भी किया है। अच्‍छा हो, बुरा हो, सही हो, गलत हो- इतिहास अपना मूल्‍यांकन करता रहता है लेकिन भरसक कोशिश करनी पड़ी है।

लेकिन भारत की पहचान अलग है। भारत की विशेषता है भारत की विविधता में एकता। हम विविधताओं से भरे हुए हैं। विविधता में एकता हमारा गर्व है, हमारा गौरव है, हमारी गरिमा है, हमारी पहचान है। हमारे यहां विविधता को diversity को celebrate किया जाता है। हमें विविधता में कभी भी, सदियों से विविधता में400 विरोधाभास कभी नहीं दिखता, लेकिन हमें विविधता के अंतर्निहित एकता का सामर्थ्‍य दिखता है।

विविधता का celebration, विविधता का उत्‍सव उसके अंदर छिपी हुई एकता का स्‍पर्श कराता है, उसे उभार करके बाहर लाता है, जीने की प्रेरणा देता है, जुड़ने का जज्‍बा देता है, मंजिल के साथ अपने-अपने मकसद जुड़ते चले जाते हैं और मंजिलें पार भी हो जाती हैं।

जब हम देश की अलग-अलग भाषाओं और सैंकड़ों बोलियों पर गर्व करते हैं तो बोलियां भिन्‍न होने के बावजूद भी भाव का बंधन बंध जाता है; जब हम अपने भिन्‍न-भिन्‍न खानपान, वेशभूषाओं को अपनी समृद्ध विरासत समझते हैं तो 500अपनेपन की मिठास उसमें आ ही जाती है; जब हम अलग-अलग क्षेत्रों के त्‍योहारों में शामिल होते हैं तो उनकी खुशी और बढ़ जाती है और नए रंग भर जाते हैं, और नई महक आने लगती है।

जब हम अलग-अलग राज्‍यों की परम्‍पराओं को, विशेषताओं को, संस्‍कृतियों को, उनकी  विविधताओं का आनंद लेते हैं तो भारतीय का गौरव, भारतीयता का भाव चारों दिशाओं में फलता है, फूलता है, खिलता है, गौरव बहुत बढ़ जाता है। जब हम विभिन्‍न पंथ, संप्रदायों, उनकी परम्‍पराओं, आस्‍थाओं का समान रूप से सम्‍मान करते हैं तब सद्भाव, स्‍नेहभाव, उसमें भी अनेक गुना वृद्धि हो जाती है 600और इसलिए हमें हल पल विविधिता के हर अवसर को celebrate करना है, उत्‍सव के रूप में उसको मनाना है, जी-जान से जुड़ना है और यही तो एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत, यही तो Nation Building है।

साथियो, ये वो ताकत है जो पूरी दुनिया में किसी और देश के भाग्‍य में नहीं मिलेगी। यहां दक्षिण से निकले आदिशंकराचार्य उत्‍तर में जा करके हिमालय की गोद में पहुंच करके मठों की स्‍थापना करते हैं, यहां बंगाल से निकले स्‍वामी विवेकानंद को देश के दक्षिणी छोर, कन्‍याकुमारी में नया ज्ञान प्राप्‍त होता है, यहां पटना में अवतरित हुए जन्‍म धारण किए हुए गुरूगुरू700 गोविंद सिंह जी पंजाब में जाकर देश की रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्‍थापना करते हैं, यहां रामेश्‍वरम में पैदा हुए एपीजे अब्‍दुल कलाम दिल्‍ली में देश के सर्वोच्‍च पद पर आसीन होते हैं, गुजरात के पोरबंदर की धरती पर पैदा हुआ मोहनदास करमचंद गांधी चंपारण में, बिहार में जा करके देश को जगाने का बीड़ा उठाता था और इसलिए मैं मानता हूं कि अपनी एकता की इस ताकत का पर्व निरंतर मनाना बहुत आवश्‍यक है।

एकता की ये ताकत ही है जिससे भारतीयता का प्रवाह है, गति है; एकता की ये ताकत ही है जो सच्‍चे अर्थ में 800     डॉक्‍टर बाबा साहेब अम्‍बेडकर द्वारा लिखित हमारे संविधान की प्रेरणा भी है। We the people of India- हम भारत के लोग ये तीन-चार शब्‍द नहीं हैं, सिर्फ हमारे संविधान की शुरूआत नहीं हैं, ये हजारों वर्षों से चली आ रही भारतीयों की एकता के भाव को शब्‍दों में सजाया हुआ हमारा चिर-पुरातन सांस्‍कृतिक इतिहास है, परम्‍परा है, विश्‍वास है, प्रतिबिंब है।

साथियो, मैं आपको खेल की दुनिया से एक उदाहरण देता हूं। हम जानते हैं जब गांव के अंदर खेल की शुरूआत होती है, प्रतियोगिता होती है तो उसी गांव की दोनों टीम जीतने के लिए पूरी ताकत लगा देते900 हैं। एक हारता है, एक जीतता है- जीतने वाला तहसील में चला जाता है। जब तहसील के अंदर खेल खेला जाता है तो हारने वाली टीम समेत उस गांव के लोग भी और तहसील के लोग भी अपनी टीम जीत जाए, इसके लिए एकता के साथ खड़े हो जाते हैं। लेकिन जब दूसरे तहसील हार जाते हैं, लेकिन जब टीम जिले में जाती है मुकाबला करने के लिए तो फिर हारने वाला भी जिले की जीत के लिए जुड़ जाता है और पूरा जिला एक बन करके जीतने के लिए आगे आता है और जब राज्‍य के अंदर जिलों की स्‍पर्धा 1000होती है

110wpm 11 min Grade C 


साथियो, हम लोगों ने सरदार वल्‍लभ भाई पटेल के विचार अभी-अभी सुने। उनकी आवाज हमारे कानों में गूंजना, उनके विचारों की वर्तमान में महत्‍ता, प्रतिपल देश की एकता और अखण्‍डता के लिए सोचना- ये आज उनके एक-एक शब्‍द में, उनकी वाणी में हम अनुभव कर रहे थे। उनकी वाणी में जो शक्ति थी, उनके विचारों में जो प्रेरणा थी उसे हर हिन्‍दुस्‍तानी महसूस कर सकता है और ये भी बहुत विशेष है कि हम सरदार साहब की आवाज उन्‍हीं की सबसे ऊंची प्रतिमा के सानिध्‍य में सुन रहे थे।

साथियो, जिस तरह किसी श्रद्धा स्‍थल पर आकर एक असीम शांति 100 मिलती है, एक नई ऊर्जा मिलती है, वैसी ही अनुभूति मुझे यहां सरदार साहब के पास आ करके होती है। लगता है जैसे उनकी प्रतिमा का भी अपना एक व्‍यक्तित्‍व है, सामर्थ्‍य है, संदेश है; उतनी ही विशाल, उतनी ही दूरदर्शी और उतनी ही पवित्र देश के अलग-अलग कोने से, किसानों से मिले लोहे से, अलग-अलग हिस्‍सों की मिट्टी से इस भव्‍य प्रतिमा का निर्माण हुआ है, उसका आधार बना है और इसलिए ये प्रतिमा हमारी विविधता में एकता का भी जीवंत प्रतीक है, जीता-जागता संदेश है।

साथियो, आज से ठीक एक साल पहले दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा को200 देश को समर्पित किया गया था। आज ये प्रतिमा सिर्फ भारत वासियों को ही नहीं, पूरे विश्‍व को आकर्षित कर रही है, प्रेरित कर ही है। आज इस प्रेरणा स्‍थली से सरदार वल्‍लभ भाई पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए संपूर्ण राष्‍ट्र गौरव का अनुभव कर रहा है।

अब से कुछ देर पहले ही राष्‍ट्रीय एकता का संदेश दोहराने के लिए, एकता के मंत्र को जीने के लिए, एकता के भाव को चरितार्थ करने के लिए, एकता- ये हमारे संस्‍कार हैं, ये हमारी संस्‍कार सरिता है, एकता- ये हमारे भावी सपनों का सबसे बड़ा संबल है और उसी को ध्‍यान में  300पाते हैं कि एकरूपता उन देशों की विशेषता रही है, पहचान रही है और उसको ढालने का बहुत योजनाबद्ध तरीके से प्रयास भी किया है। अच्‍छा हो, बुरा हो, सही हो, गलत हो- इतिहास अपना मूल्‍यांकन करता रहता है लेकिन भरसक कोशिश करनी पड़ी है।

लेकिन भारत की पहचान अलग है। भारत की विशेषता है भारत की विविधता में एकता। हम विविधताओं से भरे हुए हैं। विविधता में एकता हमारा गर्व है, हमारा गौरव है, हमारी गरिमा है, हमारी पहचान है। हमारे यहां विविधता को diversity को celebrate किया जाता है। हमें विविधता में कभी भी, सदियों से विविधता में400 विरोधाभास कभी नहीं दिखता, लेकिन हमें विविधता के अंतर्निहित एकता का सामर्थ्‍य दिखता है।

विविधता का celebration, विविधता का उत्‍सव उसके अंदर छिपी हुई एकता का स्‍पर्श कराता है, उसे उभार करके बाहर लाता है, जीने की प्रेरणा देता है, जुड़ने का जज्‍बा देता है, मंजिल के साथ अपने-अपने मकसद जुड़ते चले जाते हैं और मंजिलें पार भी हो जाती हैं।

जब हम देश की अलग-अलग भाषाओं और सैंकड़ों बोलियों पर गर्व करते हैं तो बोलियां भिन्‍न होने के बावजूद भी भाव का बंधन बंध जाता है; जब हम अपने भिन्‍न-भिन्‍न खानपान, वेशभूषाओं को अपनी समृद्ध विरासत समझते हैं तो 500अपनेपन की मिठास उसमें आ ही जाती है; जब हम अलग-अलग क्षेत्रों के त्‍योहारों में शामिल होते हैं तो उनकी खुशी और बढ़ जाती है और नए रंग भर जाते हैं, और नई महक आने लगती है।

जब हम अलग-अलग राज्‍यों की परम्‍पराओं को, विशेषताओं को, संस्‍कृतियों को, उनकी  विविधताओं का आनंद लेते हैं तो भारतीय का गौरव, भारतीयता का भाव चारों दिशाओं में फलता है, फूलता है, खिलता है, गौरव बहुत बढ़ जाता है। जब हम विभिन्‍न पंथ, संप्रदायों, उनकी परम्‍पराओं, आस्‍थाओं का समान रूप से सम्‍मान करते हैं तब सद्भाव, स्‍नेहभाव, उसमें भी अनेक गुना वृद्धि हो जाती है 600और इसलिए हमें हल पल विविधिता के हर अवसर को celebrate करना है, उत्‍सव के रूप में उसको मनाना है, जी-जान से जुड़ना है और यही तो एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत, यही तो Nation Building है।

साथियो, ये वो ताकत है जो पूरी दुनिया में किसी और देश के भाग्‍य में नहीं मिलेगी। यहां दक्षिण से निकले आदिशंकराचार्य उत्‍तर में जा करके हिमालय की गोद में पहुंच करके मठों की स्‍थापना करते हैं, यहां बंगाल से निकले स्‍वामी विवेकानंद को देश के दक्षिणी छोर, कन्‍याकुमारी में नया ज्ञान प्राप्‍त होता है, यहां पटना में अवतरित हुए जन्‍म धारण किए हुए गुरूगुरू700 गोविंद सिंह जी पंजाब में जाकर देश की रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्‍थापना करते हैं, यहां रामेश्‍वरम में पैदा हुए एपीजे अब्‍दुल कलाम दिल्‍ली में देश के सर्वोच्‍च पद पर आसीन होते हैं, गुजरात के पोरबंदर की धरती पर पैदा हुआ मोहनदास करमचंद गांधी चंपारण में, बिहार में जा करके देश को जगाने का बीड़ा उठाता था और इसलिए मैं मानता हूं कि अपनी एकता की इस ताकत का पर्व निरंतर मनाना बहुत आवश्‍यक है।

एकता की ये ताकत ही है जिससे भारतीयता का प्रवाह है, गति है; एकता की ये ताकत ही है जो सच्‍चे अर्थ में 800     डॉक्‍टर बाबा साहेब अम्‍बेडकर द्वारा लिखित हमारे संविधान की प्रेरणा भी है। We the people of India- हम भारत के लोग ये तीन-चार शब्‍द नहीं हैं, सिर्फ हमारे संविधान की शुरूआत नहीं हैं, ये हजारों वर्षों से चली आ रही भारतीयों की एकता के भाव को शब्‍दों में सजाया हुआ हमारा चिर-पुरातन सांस्‍कृतिक इतिहास है, परम्‍परा है, विश्‍वास है, प्रतिबिंब है।

साथियो, मैं आपको खेल की दुनिया से एक उदाहरण देता हूं। हम जानते हैं जब गांव के अंदर खेल की शुरूआत होती है, प्रतियोगिता होती है तो उसी गांव की दोनों टीम जीतने के लिए पूरी ताकत लगा देते900 हैं। एक हारता है, एक जीतता है- जीतने वाला तहसील में चला जाता है। जब तहसील के अंदर खेल खेला जाता है तो हारने वाली टीम समेत उस गांव के लोग भी और तहसील के लोग भी अपनी टीम जीत जाए, इसके लिए एकता के साथ खड़े हो जाते हैं। लेकिन जब दूसरे तहसील हार जाते हैं, लेकिन जब टीम जिले में जाती है मुकाबला करने के लिए तो फिर हारने वाला भी जिले की जीत के लिए जुड़ जाता है और पूरा जिला एक बन करके जीतने के लिए आगे आता है और जब राज्‍य के अंदर जिलों की स्‍पर्धा 1000होती है तो जिला आगे बढ़ता है; जब देश के अंदर राज्‍यों की प्रतियोगिता होती है तो राज्‍य की विजय के लिए सब एक हो जाते हैं। जय-पराजय मायना नहीं रखता है।
एकता का भाव और जब अंतरराष्‍ट्रीय जगत में खेलने के लिए जाते हैं तो हर कोई भूल जाता है वो टीम कहां की थी, खिलाड़ी कहां का था, भाषा उसकी कौन सी थी, उसने मुझे हराया था कि नहीं हराया था; सब भूल जाते हैं और जब हिन्‍दुस्‍तान के तिरंगे को अपने कंधे पर ले करके जब वो विजय की दौड़ लगाता है तो पूरा हिन्‍दुस्‍तान दौड़ पड़ता है,1100 एक साथ भारत मां का जयकारा निकल पड़ता है; यही तो एकता की ताकत है जिसका हम अनुभव करते हैं।
जब विदेशी धरती पर मैडल जीतने के बाद तिरंगा लहराता है तो कश्‍मीर से ले करके कन्‍याकुमारी तक, महाराष्‍ट्र से ले करके मणिपुर तक एक साथ हर हिन्‍दुस्‍तानी रोमांचित हो उठता है, हर किसी की भावनाएं उफान पर आ जाती हैं।

साथियो, जब सरदार वल्‍लभ भाई पटेल 500 से ज्‍यादा रियासतों के एकीकरण के भगीरथ कार्य के लिए निकले थे तो यही वो चुंबकीय शक्ति थी जिसमें ज्‍यादातर राजे-रजवाड़े उसी भाव विश्‍व के अंदर खिंचे चले आए थे। उस समय हर रजवाड़े और वहां के लोगों में कहीं न कहीं भारतीयता की भावना भरी पड़ी थी1220words

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